प्रेम विराग

दुर्बल होता ही जाये ये मन उनके विराग में
रात दिन जलता ही जाये मन प्रेम के चिराग में
अन्‍धकार की पीड़ा ना सह पाऊँ है चांदनी रात
प्रतिक्षा मे तेरी मुरझा गये फूल प्रेम के बाग में
अभिषेक शर्मा अभि

ffhhhhhhh

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 07/09/2016
  3. babucm 07/09/2016
  4. Dr Swati Gupta 07/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/09/2016

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