कचरा पेटी2…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

कभी कभी घुटन कितनी भयावह हो जाती है….
सांस चलती रहती है सहज सी पर…
लगता जैसे बोझ सा उठाये चल रही है…
ना खुद रूकती है ना दिल को ठहरने देती है….

तुम जब थे साथ तो साँसों में तुम्हारी खुशबू थी…
अपने शरीर की गंध भी उमंग देती थी…
अपने को अलग अलग रूप में संवारने का…
एक अजीब सी ललक थी हर अंदाज़ में अपने को निखारने की…
एक तरंग थी जो नृत्य करने को मजबूर कर देती थी…
एक प्यास थी जो चाह को मजबूत करती थी….
एक अहसास थी जो अपने को अपने से मिलाती थी…
जो दुनिया की हर शै से अलग कर देती थी बदहवास सी…
एक मुस्कराहट थी जो हर किसी को अपना बना लेती थी…
एक तमन्ना थी हर उस मुकाम को पाने की जो किसी का ना था…

आज वही गंध अपनी….
परायी सी है…
घुटन देती है….बहुत….
चले गए तुम….
बदल दिया मुझको….
\
/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

32 Comments

  1. Manjusha 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
  2. Meena bhardwaj 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
  3. mani 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
  4. Kajalsoni 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
  5. शीतलेश थुल 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
  8. Shishir "Madhukar" 07/09/2016
    • babucm 07/09/2016
    • babucm 08/09/2016
  9. Dr Swati Gupta 07/09/2016
    • babucm 08/09/2016
  10. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/09/2016
    • babucm 08/09/2016
  11. Markand Dave 21/09/2016
    • babucm 21/09/2016
  12. RAJ KUMAR GUPTA 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  13. babucm 23/09/2016
      • babucm 23/09/2016

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