हँसी ताज महल – शिशिर मधुकर

मेरी आँखों के सामने वो जब से आया है
उसकी सूरत की आभा ने मुझे लुभाया हैं

बड़े पास से जब मैंने उसका दीदार किया
हर एक अंग में हँसी ताज महल पाया है

मैंने शराब पीना यारो कभी से छोड़ दिया
उसके लबों ने मुझे फ़िर नशे में डुबाया है

अपने घर को मैंने फूलों से सजाया किया
पर उसकी सांसों ने ही इसको मह्काया है

जिस सुकून को मधुकर सदा तरसा किया
उसके आगोश में ही उसका अंश पाया है

शिशिर मधुकर

18 Comments

  1. Manjusha 06/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  2. C.m sharma(babbu) 06/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 07/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  5. Meena bhardwaj 07/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  6. Kajalsoni 07/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  7. शीतलेश थुल 07/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016
  8. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 07/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 07/09/2016

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