बिटिया प्यारी – (विवेक बिजनोरी)

उजियारा लेकर के आयी अँधेरे इस जीवन में,
बहुत ख़ुशी थी घर पे सबको, था उल्लास भरा सबके मन में
लोग न जाने फिर भी क्यूँ बेटो पे ही खुश होते हैं,
बिटिया तो एक छाया बृक्ष है कांटो भरे इस बन में

उजियारा लेकर के आयी अँधेरे इस जीवन में,

उंगली पकड़ के मेरी जब साथ मेरे वो चलती है
नन्हे नन्हे पैरो से जब गिरती और संभलती है
सब मिल जाता उसके हंसने से, क्या रख्हा किसी धन में

उजियारा लेकर के आयी अँधेरे एक जीवन में,

साथ छोड़ देंगे बेटे एक दिन बेटी ही काम आएगी,
पराये घर पे होक भी वो मेरा मान बढ़ाएगी
बेटी है बेटो से बढ़कर फिर क्यूँ रहे तू उलझन में

उजियारा लेकर के आयी अँधेरे इस जीवन में,
बहुत ख़ुशी थी घर पे सबको, था उल्लास भरा सबके मन में

विवेक कुमार शर्मा

19 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/09/2016
  2. vivekinfotrend 06/09/2016
  3. babucm 06/09/2016
    • vivekinfotrend 21/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" 06/09/2016
    • vivekinfotrend 21/09/2016
  5. Praveen Kumar 06/09/2016
    • vivekinfotrend 21/09/2016
  6. Kajalsoni 06/09/2016
    • vivekinfotrend 21/09/2016
  7. vivekinfotrend 07/09/2016
    • Preeti bahuguna 07/09/2016
  8. Radhey 07/09/2016
    • Vivek Sharma 07/09/2016
  9. Vivek Sharma 10/09/2016
  10. DEVENDRASINGH NEGI 21/09/2016
    • vivekinfotrend 21/09/2016
  11. Devendra Singh negi 21/09/2016
    • vivekinfotrend 21/09/2016

Leave a Reply