बरसे बरसे बरखा बरसे………………..मनिंदर सिंह “मनी”

बरसे बरसे बरखा बरसे,
पिया मिलन को जिया तरसे,

घनघोर बदरिया छायी रे,
जले बदन बरखा के जल से,

पुरज़ोर बिजुरिया भी है चमके,
सावन संग मेरे नैना भी बरसें,

कहीं कोई कोयलिया कु कु कूके,
चिढ़ होवे मुझे बहती सर्द हवा से,

छोड़ “मनी” सेवाई तू आजा रे,
संग तेरे झूमने को है मन तरसे,
तू आजा रे….

21 Comments

  1. Vivek Sharma 06/09/2016
  2. Vivek Sharma 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  4. Bharti das 06/09/2016
  5. mani 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  7. Bindeshwar prasad sharma 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  8. babucm 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  9. Shishir "Madhukar" 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  10. Kajalsoni 06/09/2016
    • mani 06/09/2016
  11. Markand Dave 08/09/2016
    • mani 10/09/2016

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