कामयाबी की चमक – (विवेक बिजनोरी )

“नाकाम था तो लोग ठुकरा गए मुझे,
एक राह के पत्थर की तरह रस्ते से हटा गए मुझे
आज जब वो पत्थर रत्नों में गिना जाने लगा,
तो देखने के लिए दूर दराज से आ गए मुझे”

विवेक कुमार शर्मा

5 Comments

  1. babucm 06/09/2016
  2. mani 06/09/2016
  3. Vivek Sharma 06/09/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 06/09/2016

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