शिक्षक होते पथ प्रदर्शक

कोई बताये कहाँ से लाये
वो गुजरा प्यारा समाज
धर्म ग्रन्थ का बोझ था पर
शास्त्रों का था पूरा राज.
जीवन मात्र नहीं है हलचल
दुःख सुख भ्रम भय होते पल पल
विवेक जगाये वही है विद्या
जीने का स्वरुप है शिक्षा .
सामान्य नहीं होते हैं शिक्षक
वो होते हैं पथ प्रदर्शक
देते है शिक्षण संस्कार
भरते उर में सुभग विचार.
शिक्षण के महत्व को समझे
सार्थक हो इनकी पहचान
इक प्रतीक का पर्व बने न
पावन हो शिक्षक की शान

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 05/09/2016
    • Bharti das 06/09/2016
  2. C.m sharma(babbu) 05/09/2016
    • Bharti das 06/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 05/09/2016
    • Bharti das 06/09/2016

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