अधूरी प्रेम-कहानी-II

जिस रास्ते वो हमेशा गुजरा करती, मैंने वही अपना दम तोड़ दिया,
निकाल कर खंजर दामन से, अपने सीने के पार किया,
पड़ेगी कभी तो नजर मेरे नाम पर, यारो से कहकर कब्र वहा बनवा दिया,
कब्र पे अपनी में खुद, दिया जलाया करता था,
इन्तजार करता हु अभी मैं उसका, ये पैगाम दिया करता था,
जिस रास्ते वो हमेशा गुजरा करती, मिलने की दुआं किया करता था,
तेरी आँखों में मैं अब अपना प्यार देखा करता था,
तू कुछ कुछ मुझपे मरती है, ये पयाम देखा करता था…
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To Be Continue
शीतलेश थुल

14 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • शीतलेश थुल 04/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • शीतलेश थुल 04/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • शीतलेश थुल 04/09/2016
    • शीतलेश थुल 04/09/2016
    • शीतलेश थुल 04/09/2016
  4. mani 03/09/2016
    • शीतलेश थुल 04/09/2016
  5. Cm sharma (babbu) 04/09/2016
    • शीतलेश थुल 04/09/2016

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