प्रेम की कली……मनिंदर सिंह “मनी”

प्रेम की कली अभी अभी खिली,
उदास दिल को ख़ुशी अब मिली,,

हर राह पर था, तन्हा, अकेला,
आँखों में बन काजल सी खिली,,

मदहोश कर गयी सूरत उसकी,
मद बन दिल में उतरती मिली,,

लहराती जुल्फे, कटार से नैन,
आज मेरा कत्ल करती मिली,,

हार कर भी सब कुछ जीत गया,
जब साथ चलने की रजा मिली,

17 Comments

  1. शीतलेश थुल 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  5. Dr Swati Gupta 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  6. babucm 04/09/2016
    • mani 04/09/2016
  7. Kajalsoni 04/09/2016

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