सोलह श्रॄंगार – शिशिर मधुकर

तुम मेरे फूल हो जिसको मैं बालों में सजाती हूँ
तेरी यादों के नगमों को मैं हरदम गुनगुनाती हूँ
तुम्हे दिल में बिठाकर मैं सोलह श्रॄंगार करती हूँ
मेरे देवता तुम जान लो मैं तुमसे प्यार करती हूँ

जब तुम संग होते हो मैं कोई चिंता न करती हूँ
तुम्हारी ही छवि हर सुबह मैं आँखो में भरती हूँ
तुम हरदम रहो मेरे खुदा यही दरकार करती हूँ
मेरे देवता तुम जान लो मैं तुमसे प्यार करती हूँ

तुम्हारे खून को मैंने निज रग रग में मिलाया है
तुम्हे पाकर ही तो मैंने यहाँ ममता को पाया है
मैं कुछ भी नहीँ तेरे बिन यही इकरार करती हूँ
मेरे देवता तुम जान लो मैं तुमसे प्यार करती हूँ

तुम्हे अगर ठेस लग जाएँ कलेजा मेरा दुखता है
इन आँखों का नीर फ़िर बहे बिना ना रुकता है
तुम कोई चोट ना खाओ दुआ हर बार करती हूँ
मेरे देवता तुम जान लो मैं तुमसे प्यार करती हूँ

शिशिर मधुकर

18 Comments

  1. Manjusha 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  2. शीतलेश थुल 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  3. babucm 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  5. mani 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/09/2016
  6. Sweta yadav 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 04/09/2016
  7. Kajalsoni 04/09/2016
  8. Shishir "Madhukar" 04/09/2016

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