छल -प्रियंका ‘अलका’

तुम्हें नहीं मालूम
मैंने तुमसे
बहुत सारी बाते
छिपा कर रखी हैं
बहुत सारी………
जैसे,
रोटियां बनाते वक्त
सबसे गोल रोटी
मैं तुम्हारे लिए रखती हूँ,
तुम्हारे पसंद की सब्जी
मैं कम खाती हूँ
ताकी तुम
ज्यादा खा सको,
तुम्हारे घर से
निकलते वक्त
हर बार मैं ईश्वर से
प्रार्थना करती हूँ कि
तुम सकुशल घर
वापस आओ,
हर झगड़े के बाद
मैं खुद को कोसती हूँ
और हर जनम में
सिर्फ तुम्हारा साथ
मांगती हूँ ।

तुम्हें नहीं मालूम
इसके अलावा भी मैंने
तुमसे बहुत कुछ छिपाया है …
जैसे,
मेरे ह्रदय में
बहुत सारे कमरें हैं
गहरे-गहरे
घोर तम में
डूबे-डूबे
सख्त दरवाजो वाले
जिनमें बहुत सारे
राज बंद हैं
जिन्हें मैं दिखाती नहीं
जिन्हें तुम देखते नहीं ।।

कभी-कभी मैं सोचती हूँ
बातों की गगरी
राजों की गठरी
तुमसे छिपा कर
मैंने छला है तुम्हें,

पर सच क्या है
आखिर छल किसने किया
मैंने कुछ न बता कर
या तुमने कभी भी
कुछ नहीं पूछ कर ।

अलका

16 Comments

  1. Meena bhardwaj 03/09/2016
    • ALKA 23/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • ALKA 23/09/2016
  3. mani 03/09/2016
    • ALKA 23/09/2016
  4. babucm 03/09/2016
    • ALKA 23/09/2016
    • ALKA 23/09/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • ALKA 23/09/2016
  6. Jay Kumar 03/09/2016
    • ALKA 23/09/2016
  7. kiran kapur gulati 04/09/2016
    • ALKA 23/09/2016

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