ना मुझे सपनो में दिखते हो…….मनिंदर सिंह “मनी”

ना मुझे सपनो में दिखते हो,
ना ही तुम मुझे खत लिखते हो,

दर पर बैठी तेरी बाट में,
पर तुम आते नहीं दिखते हो,

कहते थे रोज लिखूंगा खत,
मुझे तो अब झूठे से लगते हो,,

कभी हमसाया थे तुम मेरे,
अंधेरो में गुम हुए लगते हो,,

ढूंढू कहाँ तुम्हे मैं सनम,
शायद तुम मुझ से छिपते हो,

18 Comments

  1. Bimla Dhillon 02/09/2016
    • mani 02/09/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 02/09/2016
  3. mani 02/09/2016
  4. ALKA 02/09/2016
    • mani 03/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  6. Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  7. Manjusha 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  8. babucm 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  9. शीतलेश थुल 03/09/2016
    • mani 03/09/2016
  10. mani 03/09/2016

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