प्रेम की गलियो में…….मनिंदर सिंह “मनी”

जाने कब मैं प्रेम की गलियो में आ गया,
दिल पर इक अजब सा खुमार छा गया,,

अभी रखा ही था पाँव जवानी के दर पर,
साथ चलने का वादा लिए कोई आ गया,,

खोया था कल तक बचपन की कहानी में,
चुपके से दिल में कोई जगह बना सा गया,

बचपन का याराना ना चाहते छूटने लगा,
देख मुझे कहता हर कोई भंवरा आ गया,,

ना देखी जात मैंने ना पूछी कोई बात “मनी”
एक पल में उस पर सब कुछ हार सा गया,,

16 Comments

    • mani 01/09/2016
  1. निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
  2. ALKA 01/09/2016
  3. mani 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
    • mani 02/09/2016
  5. Kiran Kapur Gulatit 02/09/2016
    • mani 02/09/2016
  6. babucm 02/09/2016
    • mani 02/09/2016
  7. शीतलेश थुल 02/09/2016
    • mani 02/09/2016

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