प्रेम का बाग़……………मनिंदर सिंह “मनी”

तलाश रहे है लोग वजह मुस्कुराने की,
टूटे हुए रिश्तो को फिर से निभाने की,,

अंजाने में हुई अपनों से भूलो को भूल,
चेष्टा मे हर कोई अपनों को मनाने की,,

दिलो में प्रेम ही प्रेम इक दूजे के लिए,
चाहत में हर कोई अपनों को पाने की,

छोटे छोटे से परिवारों में बंधा हर कोई,
हठ सभी की बैठ आँगन में बतियाने की,,

गुजारिश है “मनी” की भुला कर ईष्या को,
कोशिश करो सभी प्रेम का बाग़ सजाने की,

16 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
  3. Dr Swati Gupta 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
  4. babucm 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
  5. ALKA 01/09/2016
  6. mani 01/09/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
    • mani 01/09/2016
  8. शीतलेश थुल 02/09/2016
  9. mani 02/09/2016

Leave a Reply