संघर्ष

SheetKasmir
मेरे घर के हालात कश्मीर जैसे हो गये दोस्तों,
दुश्मन (अतिथि) बिन बताये घर घुस रहा है।
मैं लाख भगाऊ बातो से उसको,
वो फिर मुंह उठा के चला आ रहा है।
मैं जब भी दफ्तर से घर को लौटू,
वो मेरे घर पसरा कुछ इस कदर मिल रहा है।
जैसे मैं ही गलत घर चला जा रहा हूँ।
हिमाकत तो देखो मेरे दुश्मन की ,
रसोईघर तक घुसा चला आ रहा है।
पहले चुराता था छिप छिप कर चीजे ,
आज खुले आम चीजे ले जा रहा है।
हद हो गयी अब मेरे इंतहा की ,
वो तो मेरे घर को अब अपना ही घर समझ रहा है।
मेरे घरवालो को बरगला कर , मेरे बच्चो को भड़का रहा है।
कैसे छोड़ जाऊ मैं अपनी मेहनत का मेहनताना ,
70 साल से ये संघर्ष मेरा देश भी तो झेल रहा है।
जय हिन्द जय भारत !!!!!

शीतलेश थुल !!

18 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
  3. Dr Swati Gupta 01/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
  4. babucm 01/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 01/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
  6. mani 01/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
    • शीतलेश थुल 02/09/2016

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