अर्थ

यह खबर फैली थी चारों ओर
देश की अर्थ व्यवस्था है कमजोर
लोगों की आर्थिक स्थिति में गिरावट आई है
इस कारण भयंकर मायूसी छाई है

अर्थ संयोजन मनुष्य का प्रमुख धर्म है
इस ध्येय से बंधे हमारे सारे कर्म है
मगर ये अर्थ है क्या जिसकी महत्ता है इतनी
जैसे राजनीति में महत्वपूर्ण सत्ता है जितनी

शब्दों के अर्थ समझ रहा हूँ बचपन से
अब भी अर्थ की समझ बाकी है जीवन से
अर्थ का एक पर्याय मतलब होता है
जीवन आज मतलब का सिर्फ एक सोता है

धन उपार्जन को हम जीवन का अर्थ समझते हैं
जीवन में मूल्य ही जीवन को सही अर्थ देते हैं
धन से नहीं, सद्गुणों से जीवन धन्य होता है
अर्थी पर आकर सारा अर्थ स्पष्ट प्रकट होता है

जन जीवन में सही अर्थ का निवास होगा जब
देश का पूर्णरूपेण आर्थिक विकास होगा तब
व्यवस्थित होगा सही अर्थ समाज में हर रोज
मानव ही कर सकता है जीवन के अर्थ की खोज

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • Uttam 01/09/2016
    • Uttam 01/09/2016
  2. mani 01/09/2016
    • Uttam 01/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • Uttam 01/09/2016
  4. babucm 01/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016

Leave a Reply