बाढ़ त्रासदी (हाइकू)

ब़ाढ़ त्रासदी
डूबे गाँव शहर
लोग चिल्लाये !!

नहीं दिखता
पानी का छोर! बस
बढ़ता जाये!!

जड़ जंगम
मिट गये कितने
हो असहाय!!

बिलखती माँ
देख बहता लाल
निकले आह!!

जल तूफान
धराशायी झोपडी
ध्वस्त मकान!!

तैरती लाशें
नोचते चील कौवे
डूबे श्मशान!!

उठे दुर्गन्ध
मरे जानवरों से
व्याकुल प्राण!!

बूझे न प्यास
सड़ा पानी सर्वत्र
जन हल्कान!!

नेता नभ में
उड़ें! देखें तमासे
हसे मुस्काएँ!!

होता घोटाला
राहत शिविरों में
हिय जलाएँ!!

प्रसव पीड़ा
कराहती औरतें
पानी में खड़ी!!

मातम बीच
भूखे बाल गोपाल
मुश्किल घड़ी!!

स्याह रातों में
घूमते साँप बिच्छू
आफत बड़ी!!

है प्रश्न वही
घर छोड़ नदी क्यों
आज यूँ चढ़ी!!
!!!!
!!!!
सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘कुशक्षत्रप’

14 Comments

  1. babucm 01/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
  3. Dr Swati Gupta 01/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma 01/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
  6. mani 01/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 02/09/2016

Leave a Reply