बेख़ौफ़ – शिशिर मधुकर

हुस्न जब बेखौफ हो किसी से जहाँ में मिलता है
उसकी हर बात में तब हाल ए दिल निकलता है.

दिलों के बीच जहाँ कोई दूरी ना बाकी रहती है
उसी सूरत में असली चाहत का फूल खिलता है

जब दुनियाँ के रंज और ग़म भी ना कोई शोर करें
ऐसी खामोशी में तो कोई पत्ता भी नही हिलता है

उल्फ़त में कई चोटें भी दिलों को लगती रहती हैं
पर ऐसे जख्मों को यहाँ कभी ना कोई सिलता है

कुछ भी मिल जाएँ तुम्हे मधुकर इस ज़माने में
रूह को सुकूँ तो सनम की बाहों में ही मिलता है

शिशिर मधुकर

24 Comments

  1. Uttam 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  3. mani 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  5. Manjusha 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  6. babucm 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  7. Dr Swati Gupta 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  8. ALKA 01/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/09/2016
  10. Shishir "Madhukar" 01/09/2016
  11. Sweta yadav 03/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 04/09/2016

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