चेहरा – बी पी शर्मा बिन्दु

चिराग जलाई काली हो गई रात
बस धुॅआ ही धुॅआ निकलता रहा
न रौशनी आई न कारवाॅ चमका
कुछ इस तरह इसारे में कुछ घूॅघट में हो गई बात।
न दीदार हुआ न चश्म में उतार सके आपका चेहरा
बस कैद में ही रही रौशनी अंधेरे में मेरी तब्बसुम।
चाॅद में भी होता है दाग यह मैंने जान लिया
खुदा खैर करे उसकी मैंने भी पहचान लिया।
सांस किराये का लेकर कब-तलक जियेंगे हम
दो जून की रोटी हमें खून से निकालना पडता है।
सुकून आती है तो हम जन्नत की बात करते हंै
मुस्किल की घड़ी में अब मुहब्बत की बात करते हैं।

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

12 Comments

  1. babucm 31/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 31/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 31/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 31/08/2016
  3. mani 31/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma 01/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma 01/09/2016
  5. MANOJ KUMAR 01/09/2016
    • Bindeshwar prasad sharma 01/09/2016

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