अजब हो रही है…गज़ब हो रही है ….VINAY BHARAT

अजब हो रही है…गज़ब हो रही हैअजब हो रही है गज़ब हो रही हैदेखूँ तुझे तो गज़ल हो रही हैतेरा यूँ लटोँ को लपकना झटकनामेरा यूँ तेरे पीछे दर –दर भटकनाहसना लजाना लपकना झपकनातेरा मुझसे आकर जरा सा चिपकनाये दुनिया को कैसी जलन हो रही हैअजब हो रही …..कि देखो भ्रमर आके बैठा जहाँ परसमझ फूल सुन यूँ तेरी नासिका परउछलके वो तेरी अजब बौखलाहटतुझे छेडती वो मेरी मुस्कुराहटफिर दोनोँ का हँसना ,वो मस्ती का झरनामोह्ब्बत कि कैसी तपन हो रही हैअजब हो रही है….मोहल्ले मेँ दोनोँ का छुप – छुप के मिलनाकभी मिल्क डेरी का छीना झपटनातेरा रूस जाना मेरा यूँ मनानादिलोँ ही दिलोँ मेँ मचल मुस्कुरानाये पडोसी को कैसी जलन हो रही है अजब हो रही है…गज़ब हो रही हैरचनाकार – विनय भारत

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. babucm 11/09/2017
  2. Madhu tiwari 11/09/2017

Leave a Reply