[{पेड़}]

SheetTree
“इक छोटा सा बीज हुआ करता था कभी,
रौंदते थे आने जाने वाले सभी ,
फिर भी आलोचना ना की मैंने कभी”

“नन्हा पौधा हुआ करता था कभी,
तोड़ते मरोड़ते थे आने जाने वाले सभी,
फिर भी बढना ना छोड़ा मैंने कभी”

“इक विशाल पेड़ हुआ करता था कभी,
आने जाने वाले आश्रय लेते थे सभी,
पक्षी अपने घोसले, मनुष्य रहा करते थे सभी”

ठण्ड से बचाने , खुद को आग लगाया ,
सूरज से तपकर, फिर भी मैंने दी छाया ,
मूसलाधार से लड़कर मैंने ही था बचाया ,
भूख मिटाता था मैं कभी,
फिर भी पत्थर मारते थे सभी,

काट डाला, मार डाला, मतलबी है यहाँ सभी,
लोग कहते है अब , सड़क के बीचो-बीच
एक विशाल पेड़ हुआ करता था कभी”
शीतलेश थुल !!

16 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/08/2016
  2. शीतलेश थुल 30/08/2016
  3. babucm 30/08/2016
  4. शीतलेश थुल 30/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 30/08/2016
    • शीतलेश थुल 31/08/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • शीतलेश थुल 31/08/2016
  7. shivdutt 30/08/2016
    • शीतलेश थुल 31/08/2016
    • शीतलेश थुल 31/08/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
    • शीतलेश थुल 31/08/2016
  9. Dr Swati Gupta 30/08/2016
    • शीतलेश थुल 31/08/2016

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