आँसू

जब जुबाँ ये साथ न दे,
तन्हाई आराम न दे,
तो आंखें साथ निभाती हैं,
पीर जब दिल पर भार बन जाती है,
तो वो आँसू बनकर आँखों से बह जाती है।
आंसुओं की भाषा नही होती है कोई,
फिर भी दिल की बात समझ जाते हैं,
कभी दर्दे दिल की दास्तां,
तो कभी ख़ुशी का हाल सुनाते हैं,
अमीरी गरीबी का फर्क मालूम नहीं है इसे,
हर इंसान के जज्वातों को एक ही रंग में दिखाते हैं,
इसलिए तो कभी कभी ये आंसू ही सच्ची मित्रता निभाते हैं,
और अकेलेपन में भी अपने होने का अहसास कराते हैं।
By:Dr Swati Gupta

16 Comments

  1. babucm 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016
  2. शीतलेश थुल 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016
  3. shrija kumari 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016
  4. RAJEEV GUPTA 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
    • Dr Swati Gupta 30/08/2016

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