२६. तू जो छुप छुप के मुलाकात……….|गीत| “मनोज कुमार”

तू जो छुप छुप के मुलाकात सनम करती है
यही अदायें तो तेरी दिल को अच्छी लगती है
तेरी साँसों में जब ये साँस मेरी घुलती है
मिलने जब आती है वो रात अच्छी लगती है

तेरी सीरत पे मैं तो मर मिटा में परवाना
कहीं मैं जाऊँ ना भूल चली दूर ना जाना
मेरे हमदम तू हमें छोड़ निकल जाती है
तड़पता रहता हूँ तेरी याद भी सताती है

तू जो छुप छुप………………अच्छी लगती है

मेरी जाना तू मुझसे दिल की कहानी कह दे
बाँहों का साथ अपनी मुझको निशानी दे दे
मेरी जिन्दगी ये तुझसे मिलके सवंर जाती है
फूल से खिलते है ये और महक जाती है

तू जो छुप छुप………………अच्छी लगती है

तू जो इतराती है और कुसमों सी मुस्काती है
अधरों के प्यालों से मदिरा की खुशबू आती है
तू जो शरमाती बलखाती निकट आती है
सुरों की तान सी बन दिल में उतर जाती है

तू जो छुप छुप………………अच्छी लगती है


“मनोज कुमार”

8 Comments

    • MANOJ KUMAR 01/09/2016
  1. निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • MANOJ KUMAR 01/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 30/08/2016
    • MANOJ KUMAR 01/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
    • MANOJ KUMAR 01/09/2016

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