बेबसी—–डी. के. निवातियाँ

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जब एक इंसान इंसानियत की लाश काँधे पर ढोता है।
खबरों की सुर्खियों में उसका खूब चर्चा आम होता है ।
कोई कहे सनकी उसको, कोई व्यवस्था पर चोट करे ।
बेबसी का उसकी जमाने में मजाक सरे आम होता है ।।
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डी. के. निवातियाँ [email protected]@@

24 Comments

  1. babucm 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  2. शीतलेश थुल 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  4. mani 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  7. Dr Swati Gupta 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  8. ANAND KUMAR 03/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/09/2016
  9. Kajalsoni 04/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 05/09/2016
  10. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 21/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 21/09/2016

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