कांधा नहीं मिलता -शिशिर मधुकर

जिस पे सर रख कर हम रो लें वो कांधा नहीँ मिलता
रुके आँसू बहाये बिन कभी कोई मुखड़ा नहीं खिलता
सफर कैसे कटे तन्हा जब कोई मेरे साथ नहीँ चलता
बिना जले तो शमा का बदन भी कभी नहीं पिघलता

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/08/2016
  3. babucm 30/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/08/2016
  4. Dr Swati Gupta 30/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/08/2016
  5. Meena bhardwaj 30/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/08/2016

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