मेघों का पैगाम -शिशिर मधुकर

तुम्हारा ख्याल आता हैं तो मुझको आराम मिलता हैं
प्यासी धरती को मानो घने मेघों का पैगाम मिलता हैं

जिस मुहब्बत में हरदम पास होकर भी कोई दूर रहे
उसमें तन्हा तड़पने का ही कठिन अंजाम मिलता हैं

हम तो रुस्वा भी हुए और कितने ही दुश्मन भी बने
सताये हुए को चाहने का यही एक इनाम मिलता हैं

खुशफहमियां कई बार हम लोगों को हो ही जाती हैं
मगर सच में मुकद्दर से ज़माने का सलाम मिलता हैं

राधा सा प्रेम यहाँ करने की जिनमें कूवत हैं मधुकर
उन्ही बालाओं को तो मुरलीधर घनश्याम मिलता हैं.

शिशिर मधुकर

18 Comments

  1. Markand Dave 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  2. babucm 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  3. शीतलेश थुल 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  5. Dr Swati Gupta 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 31/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  7. डा.महेश श्रीवास्तव 28/08/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/08/2018

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