चंद लम्हे

हमने तो फ़क़त चंद लम्हे मांगे थे ज़िंदगी के
ज़ालिम ने कातिलाना हंसी उछाल दी मेरी तरफ

क्या पता था जो हंसी उछाली थी उसने मेरी तरफ
वो तो बस आईने में दिखाई दिया तसवुर भर था

जिसे जिंदगी समझ कर जी रहे थे हम अब तक
वो तो हमारी ही मौत का साजो सामान निकला

बड़ी फुरसत से कुछ हंसी इखटा किये बैठे थे हम
जब पिटारा खुला तो आंसुओ का दरिया निकला …

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/08/2016
    • tamanna 29/08/2016
  2. babucm 29/08/2016
  3. शीतलेश थुल 29/08/2016
  4. shrija kumari 29/08/2016

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