“तुम मुख़ातिब

“तुम मुख़ातिब भी हो, क़रीब भी हो
तुमको देखें कि तुम से बात करें”

तुम सोच भी हो और ख्वाभ भी
तुमको ढूंढे या तुमको याद करे

बड़े वक़्त से वक़्त लिया है जिंदगी ने
इसे जीत ले या जितने की फरियाद करे!!

फिर रेत की तरह फिसलते इन लम्हो को
संभाले या फिर संजोए रखने की आस करे !!!!

8 Comments

  1. शीतलेश थुल 29/08/2016
    • tamanna 29/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
    • tamanna 29/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" 29/08/2016
  4. babucm 29/08/2016
  5. Kajalsoni 29/08/2016

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