तेरी बातें…. सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

तेरी बातें सुनायी देती हैं…
दिल पे लिखी दिखाई देती हैं….

रोज़ सुनता हूँ दिल के तान्हें…
हार की गूँज सुनायी देती है…

तन अकेला है मन है तन्हा…
चाँद में आग दिखाई देती है…

आँखें भीगी हैं के बरसती हैं…
ये तो पत्थर दिखाई देती हैं….

दिल में तूफाँ है बाहर बूँदें….
आग बढ़ती दिखाई देती है…

हुस्न तेरे से है रोशन महफ़िल…
तू क्यूँ ग़मगीन दिखाई देती है…

ऐसे गुज़रे तुम दिल के आस्ताँ से ….
बस्ती अब भी उजड़ी दिखाई देती है….

इस कदर हुस्न जलवाफरोश तेरा…
हर तरफ तू ही तू दिखाई देती है….

थम चुका तूफाँ कब का बेशक….
सरसराहट अब भी सुनायी देती है….

तेरे आने में और जानें में….
ज़िन्दगी-मौत दिखाई देती है…

वक़्त है या कि है ये दिल तेरा…
मेरी धड़कन डूबी सुनायी देती है….

ग़ज़ल उसकी कि नसीब तेरा “बब्बू…
फ़ातिहा इश्क़ सी सुनायी देती हैं…
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/ सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

18 Comments

    • babucm 29/08/2016
  1. शीतलेश थुल 29/08/2016
  2. babucm 29/08/2016
  3. mani 29/08/2016
    • babucm 29/08/2016
    • babucm 29/08/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
    • babucm 29/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 29/08/2016
    • babucm 29/08/2016
  6. Kajalsoni 29/08/2016
    • babucm 29/08/2016
  7. shrija kumari 29/08/2016
    • babucm 29/08/2016
  8. Meena bhardwaj 29/08/2016
    • babucm 29/08/2016

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