हसरत

बहुत नादान है ये दिल तेरे सपने संजोता है
तू बन जाए मेरी ऐसा तो बस ख्वाबों में होता है

मेरे लब ख़ुश्क, आँखों में मेरी सागर उमड़ता है
तेरा चेहरा अचानक यादों में हर पल उभरता है

तबियत इन दिनों मेरी बहुत नासाज़ रहती है
मेरे खामोश लफ़्ज़ों में तेरी आवाज़ रहती है

मेरे नाशाद दिल होने के यूँ तो सौ बहाने हैं
मगर सारे बहानो से जुड़े तेरे फ़साने हैं

बिखरकर टूटता गिरता, गिरकर फिर संभलता हूँ
तुझे पाने की कोशिश में, तुझे खोने से डरता हूँ

मेरी ”हसरत” तेरी फितरत मुवस्लत कर नहीं पाए
सुकूँ की नींद तुझको हैं मैं सर सजदे झुकाता हूँ

7 Comments

  1. Bimla Dhillon 29/08/2016
    • Dr. Nitin Kumar pandey 29/08/2016
  2. babucm 29/08/2016
  3. mani 29/08/2016
  4. Kajalsoni 29/08/2016
  5. Dr. Nitin Kumar pandey 02/09/2016

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