जिंदगी के अजीब रंग

This poem is about different sides of life.

जिंदगी के भी अजीब रंग है।
नमक है ज्यादा चीनी कम है।
कभी रंगों से भरी लगती है ।
तो कभी बहुत ही बदरंग है।
कभी तो खुशियां हैं।
तो कभी गम ही गम है।
कभी तो मुस्कुराती सी लगती है।
तो कभी आँखे बहुत ही नम है।
कभी प्यार ही प्यार है।
तो कभी नफरत की मार है।
कभी सोने सी चमकती है
तो कभी लोहे की जंग है।
कभी आशा से परिपूर्ण है।
तो कभी निराशा का भँवर है।
कभी तेज हवा का झौंका है।
तो कभी कटी हुई पतंग है।
कभी बादलों से तेज चलती है।
तो कभी थमा हुआ समुद्र है।
कभी सुरीली तान है।
तो कभी बेसुरा गान है।
इसी का नाम तो जिंदगी है।
जो जीने के सिखाती हजारों ढंग है।

By:Dr Swati Gupta

11 Comments

  1. babucm 22/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  3. sarvajit singh 23/08/2016
  4. Abhishek Rajhans 24/08/2016
  5. शीतलेश थुल 24/08/2016
  6. mani 24/08/2016
  7. Rinki Raut 25/08/2016
  8. Rinki Raut 25/08/2016
  9. pallavi singh 26/08/2016
  10. Bimla Dhillon 29/08/2016

Leave a Reply