कशमकश…………सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

ज़िन्दगी मेरी तो यारो सिगार की मानिंद सी होती जाती है…
एक कश आग सी लपकती है तो दूसरे धुआं सी देती है….

ए मौजे तलब तू क्यूँ मुझको इस इश्क़ समंदर ले आयी….
एक लहर दर्द-ऐ-फुगाँ उठती है दूसरे आस्तीन भिगोती है…

क्या पता था इस कदर नाखुदा भी होगा कोई मेरा खुदा…
एक नज़र हो जिसकी ताबानी और दूसरे राख करती है…

मशवरा है मेरा तुमको ज़िन्दगी को अपनी सम्भाल रखना…
एक पल ये मसीहा दिखती है दूसरे मोहताज करती है…

ये कौन आ गया अब फिर से मीना-ऐ-हुस्न को “बब्बू”….
इक जाम जो दिल चीरती जाती है दूसरे उबल सी आती है…
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

दर्द-ऐ-फुगाँ = बहुत तेज़ दर्द, दर्द से चीखना,
ताबानी = चमक
मीना = मय/शराब

40 Comments

  1. शीतलेश थुल 22/08/2016
    • babucm 22/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" 22/08/2016
    • babucm 22/08/2016
    • babucm 22/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/08/2016
    • babucm 22/08/2016
  4. Dr Swati Gupta 22/08/2016
    • babucm 22/08/2016
    • babucm 22/08/2016
  5. sarvajit singh 23/08/2016
  6. babucm 24/08/2016
  7. mani 24/08/2016
    • babucm 26/08/2016
  8. Kajalsoni 25/08/2016
  9. C.m sharma(babbu) 25/08/2016
  10. Kajalsoni 25/08/2016
    • babucm 26/08/2016
  11. Rinki Raut 25/08/2016
  12. babucm 26/08/2016
  13. Meena bhardwaj 29/08/2016
    • babucm 30/08/2016
  14. निवातियाँ डी. के. 29/08/2016
    • babucm 30/08/2016
  15. Er Anand Sagar Pandey 10/09/2016
    • babucm 12/09/2016
  16. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 13/09/2016
  17. babucm 13/09/2016
  18. babucm 13/09/2016
  19. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 14/09/2016
    • babucm 15/09/2016
  20. Kiran Kapur Gulatit 17/09/2016
    • babucm 17/09/2016
  21. Markand Dave 22/09/2016
  22. babucm 22/09/2016
  23. Dharitri 22/09/2016
    • babucm 22/09/2016

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