जीवन का आधार – शिशिर मधुकर

तेरे बदन की भीनी ख़ुशबू मेरे जीवन का आधार है
माता प्रेयसी दोनो रूप में मुझे हरदम तुमसे प्यार हैं
ममता चाहे कम ही मिली पर उसमें न कोई खोट हैं
प्रीत निगोड़ी बैरन निकली जिसने दी केवल चोट हैं
कहीँ हैं खुशियाँ कहीँ बेबसी ये ही तो बस संसार हैं
फ़िर भी तड़पे इंसान जिसको वो तो केवल प्यार हैं

शिशिर मधुकर

14 Comments

    • Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  1. mani 22/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  2. babucm 22/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  3. शीतलेश थुल 22/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  4. Dr Swati Gupta 22/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2016
  5. sarvajit singh 23/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/08/2016

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