बॅटवारे की नादानी……….मनिंदर सिंह “मनी”

उम्र अठरा थी,
जब रखा था मैंने,
पहला कदम इस घर की,
दहलीज़ पर,
सास मुझसे बोली,
आज से,
तेरा हक़ है हर चीज़ पर,
माँ जैसी सास,
छोटी बहन जैसी ननद,
बड़ी बहन बन,
प्यार देती मेरी जेठानी,
वक्त बदला, सब कुछ बदला,
परिवार भी, छोटे से बड़े रूप में बदला,
सोच में फर्क पड़ने लगे,
दिलो में दरारे पड़ने लगी,
फिर वो बातें हुई जो किसी ने कही नहीं,
हर रोज होने लगी आना कानी,
कुछ और वक्त गुजरा,
ननद की हुई शादी,
सास ससुर दोनों हो गए स्वर्गवासी,
बंटवारे की मांग उठा दी,
फिर मैंने और जेठानी ने,
एक छोटी सी दीवार ने,
कर दिया बड़े से आंगन को छोटा,
दोनों अनजान थे,
इस बात से क्या रंग दिखाना,
उनकी इस नादानी ने,
बड़े हुए बच्चे, हुई उनकी भी शादी,
दे रहे आज हमारे बच्चे,
वही ताने, जो दिए थे कभी,
सास ससुर को,
मैंने और मेरी जेठानी ने,
लगे बच्चे अपनी चीज़,
इक दूजे से छुपाने में,
वही सब कुछ आगे आ रहा,
जो किया था,
मैंने और मेरी जेठानी ने,
पहले दो हुए, अब होंगे चार,
उसी आँगन के हिस्से,
जिसे कभी सवारा था,
मिल मैंने और जेठानी ने,
सहसा तोड़ दीवार,
अपनी बाहों में भर लिया,
मेरी जेठानी ने,
ना दिए बंटवारे के संस्कार,
हमारे पालनहारों ने,
कहाँ हो गयी खता हमसे,
जो बाट ली हर चीज़.
सिवा तकलीफ के कुछ ना पाया,
बंटवारे की कर नादानी में,
रोये आंसू पछतावे के,
गले लग एक दूजे के,
ऐ “मनी” मैंने और मेरे जेठानी ने,

नोट:- अपनी रचना को सुधार करने के बाद आप सभी विद्धवानो के सामने रखा है आपसे तहे दिल अनुरोध है अपने सुझाव जरूर दे क्योंकि मैं सुधार कर सकु |

14 Comments

  1. C.m sharma(babbu) 21/08/2016
    • mani 21/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" 21/08/2016
    • mani 22/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/08/2016
    • mani 22/08/2016
  4. Rinki Raut 21/08/2016
    • mani 22/08/2016
  5. sarvajit singh 22/08/2016
    • mani 22/08/2016
  6. Dr Swati Gupta 22/08/2016
    • mani 24/08/2016
    • mani 24/08/2016

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