शहर से प्यारा लगता गाँव

शहर से भी प्यारा लगता हमको अपना गाँव है।
शहर में वो हवा नहीं है, जो मिलती हमको गाँव में है।
यहाँ वो आराम नहीं है, सुख और चैन का नाम नहीं है।वो पेड़ों की छाँव नहीं है, जो हमको शीतल छाया दे।
वो वगिया और बाग़ नहीं हैं, जो मीठे फल से लदे हुए हों।
वो प्यारी सी चौपाल नहीं है, जहाँ दोस्तों के संग गपशप हो।
वो आम के पेड़ नहीं हैं, जहाँ सावन के झूले हो।
वो मेले और हाट नहीं हैं, जहाँ रंग बिरंगी शामें हो।
वो कुल्फी के मटके हो, और पानीपूरी के ठेले हो,
ऐसी सुकूँ की रात नहीं, जहाँ तनावमुक्त नींदे हो।
यहाँ भौतिक सुख तो हैं, पर मानसिक शांति नहीं है।
यहाँ गाड़ी, बंगले तो है पर प्यार नहीं है।
यहाँ एयरकंडीशनर तो है, पर ताज़ी हवा नहीं है।
यहाँ मॉल तो हैं,पर बगिया और बाग़ नहीं है।
कुछ भी तो ऐसा नहीं यहाँ पर जो मिलता हमको गाँव में है।
इसलिए शहर से भी प्यारा लगता हमको अपना गाँव है।

By:Dr Swati Gupta

18 Comments

  1. शीतलेश थुल 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 21/08/2016
  2. C.m sharma(babbu) 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 21/08/2016
  3. ANAND KUMAR 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 22/08/2016
  4. mani 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 22/08/2016
    • Dr Swati Gupta 22/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 22/08/2016
  6. sarvajit singh 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 22/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 22/08/2016
  8. Rinki Raut 21/08/2016
    • Dr Swati Gupta 22/08/2016

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