कली झरती हैं – शिशिर मधुकर

शांत लहरों पे जब कोई नाव तैरा करती हैं
बिना मुश्किल वो नदियाँ को पार करती हैं

जिंदगी में जो हाथ थाम संग संग चलते हैं
उनकी झोली तो खुशियों से यहाँ भरती हैं

तेज तुफानो में बडे पेड़ भी उखड़ जाते हैं
मंद हवाओं में ही शाखो से कली झरती हैं

बिना मेहनत ज़माने में कूछ ना हांसिल हैं
किस्मत जब साथ दें तो जिंदगी संवरती हैं

मीन समुन्द्र में ही मचला करती हैं मधुकर
सूखी रेती पर बिन पानी वो सदा मरती हैं

शिशिर मधुकर

17 Comments

  1. Dr Swati Gupta 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  2. C.m sharma(babbu) 21/08/2016
  3. C.m sharma(babbu) 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  4. शीतलेश थुल 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  5. mani 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  6. sarvajit singh 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 22/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 22/08/2016
  8. Rinki Raut 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 22/08/2016

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