मेरी माँ

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रोने का सलिका भी भुला देती है!
अगर माँ याद आ जाए तो जी भरकर रूला देती है!!
जब भी साये भी तेरे मुझे यादआते है!
दिल गरज् उठता है माँ आँखो मे तूफान आते है!!
ये आँखे आज भी तुम्हारी वापसी की उम्मीद करती है !
मुझे पता है माँ तू देखकर मेरा बचपना हँसती है!!
माँ अब तू जब भी मिलती हो मुझसे इतना रूलाती क्यो है।
टूटता है जैसे ही सपना तू चली जाती क्यो है।
अब तो एक ही सपना है माँ जो मैं चाहता हूँ कि सच हो जाए!
मिलो किसी रोज तू सपने में और तभी जीवित हो जाए…
और तभी जीवित हो जाए..।।
-राहुल अवस्थी
dedicated to-my mother

5 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 30/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" 31/08/2016
  4. babucm 31/08/2016

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