बिष बेलें – शिशिर मधुकर

किसी ने ठान रखा हैं कि सुख पाऊँ ना मैं कोई
तन्हाई ख़त्म हो जाएगी मिलेगा साथी जो कोई

उसने जब से मेरा इस जिंदगी में हाथ पकड़ा हैं
बैचैनी हुई हैं कम और आँखे असूअन से ना रोई

मेरी हर बात को लेकर वो अविश्वास करता था
नए साथी को मगर मुझसे शिकवा नही हैं कोई

सफर पूरा ना हुआ तो मुसाफिर क्या करें बोलो
काश मिल जाता कोई हमसफ़र राहें जब खोई

खाक हों जाएगा तू बस इसी बुरे हाल में मधुकर
छाँव देंगी ना कभी ये बिष बेलें जो तूने यहाँ बोई

शिशिर मधुकर

28 Comments

  1. शीतलेश थुल 20/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/08/2016
  2. babucm 20/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/08/2016
      • C.m sharma(babbu) 21/08/2016
        • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/08/2016
  4. mani 20/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  5. anoop mishra 20/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  6. Manjusha 20/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  7. Meena bhardwaj 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  8. Dr Swati Gupta 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  9. sarvajit singh 21/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 21/08/2016
  10. Kiran Kapur Gulatit 17/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2016
  11. MANOJ KUMAR 18/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 19/09/2016

Leave a Reply