“मेरी किताब”-शीतलेश थुल

sheetbook
“मेरी किताब”
किसी के लिए महज पन्नो की गठरी,
तो किसी के लिए कागज का टुकड़ा है किताब,
पर मेरे लिए तो मेरी दोस्त है मेरी किताब,
कोई कहता शब्दों का जाल, तो किसी के लिये मुसीबत का काल,
पर जो जीवन भर साथ निभाये वो हमसफर है मेरी किताब,
किसी के लिए तकिया तो कभी कुर्सी है किताब,
पर मेरी तो शोभा बढाती है मेरी किताब,
किसी का मन बहलाये तो किसी को गर्मी से राहत दिलाती है किताब,
बारिश की छतरी तो ठण्ड में लकड़ी बन जल जाती है किताब,
पर जो अज्ञानता के अन्धकार में ज्ञान की रौशनी बिखेरे, ऐसी है मेरी किताब,
मुझे एक सच्चा इंसान बनाती है किताब, किसी के लिए सिर्फ किताब,
पर मेरे लिए तो मेरी सच्ची दोस्त है मेरी किताब I
शीतलेश थुल !!

14 Comments

    • शीतलेश थुल 20/08/2016
  1. babucm 20/08/2016
    • शीतलेश थुल 20/08/2016
  2. tamanna 20/08/2016
  3. शीतलेश थुल 20/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" 20/08/2016
    • शीतलेश थुल 21/08/2016
  5. mani 20/08/2016
    • शीतलेश थुल 21/08/2016
  6. sarvajit singh 20/08/2016
    • शीतलेश थुल 21/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/08/2016
    • शीतलेश थुल 21/08/2016

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