ऐ चाँद—1………..मनिंदर सिंह “मनी”

ऐ चाँद जब भी देखा तुझे,
अकेला ही मिला तू मुझे,,
हर तारे का,
कोई ना कोई साथी,
तू हर पल साथ,
तलाशता मिला मुझे,
तारो में रहता तू,
सूरज से ले रौशनी,
करता रौशन तू धरती को,
बुरा ना मान जाना,
बेवफा से लगते हो तुम मुझे,
मत करो तुम ऐसा,
किसी एक का बन रह लो,
एक नाव से ज्यादा की चाह,
ऐ “मनी” ले डूबती हर किसी को,
गर डूब गया तो पूछेगा कौन तुझे,,
ऐ चाँद………………

18 Comments

  1. शीतलेश थुल 20/08/2016
    • mani 20/08/2016
  2. babucm 20/08/2016
    • mani 20/08/2016
    • mani 20/08/2016
  3. tamanna 20/08/2016
    • mani 20/08/2016
  4. Er Anand Sagar Pandey 20/08/2016
    • mani 20/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 20/08/2016
    • mani 20/08/2016
  6. sarvajit singh 20/08/2016
  7. mani 20/08/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/08/2016
    • mani 20/08/2016
  9. Dr Swati Gupta 21/08/2016
    • mani 21/08/2016

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