ओलंपिक 2016

olampic-1
नारी नर से तेज हैं पदक लीन्ह जुटाय ।
आश सबै की जात रहि मान लीन्ह बचाय ।
मान लीन्ह बचाय साक्षी सिंधु की भयि जीत ।
जोश सबमें भर करि पदक को बढ़ावैं प्रीत ।
कहैं विजय कविराय हौंसला कबहुँ न हारी ।
नर न छूटैं पीछे बढें ज्यों बढ़ रहि नारी ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

20 Comments

  1. Er Anand Sagar Pandey 19/08/2016
  2. babucm 19/08/2016
  3. शीतलेश थुल 19/08/2016
  4. ANAND KUMAR 19/08/2016
  5. mani 19/08/2016
  6. Shishir "Madhukar" 19/08/2016
  7. Meena bhardwaj 19/08/2016
  8. sarvajit singh 19/08/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/08/2016

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