यह ज़रूरी तो नहीं….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

खामोशी ही प्यार की बस हो जुबां यह ज़रूरी तो नहीं….
हर प्यार का अंजाम हो बेवफाई यह ज़रूरी तो नहीं….

दिल में इश्क़ के जज़्बात की लहर हो उठती पल पल….
उस लहर में प्यार की भी हो गहराई यह ज़रूरी तो नहीं….

तुम्हारे प्यार के काबिल हर कोई हो यह ज़रूरी है मगर…
हर किसी से तुम भी हो हरजाई यह ज़रूरी तो नहीं…..

देखा करता हूँ मैं तुमको अपने दिल में हर पल हर छिन…
तेरे दिल में कभी मेरी भी हो परछाई यह ज़रूरी तो नहीं…

“बब्बू”तो पागल है जो जला इश्क़ में बिन सोचे समझे देखे….
इश्क़ ने ऐसी आग तुमको भी हो लगाई यह ज़रूरी तो नहीं….
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

22 Comments

  1. mani 17/08/2016
    • babucm 17/08/2016
    • babucm 17/08/2016
  2. Kajalsoni 17/08/2016
    • babucm 17/08/2016
  3. Meena bhardwaj 17/08/2016
    • babucm 18/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" 17/08/2016
    • babucm 18/08/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 17/08/2016
    • babucm 18/08/2016
  6. RAJEEV GUPTA 17/08/2016
    • babucm 18/08/2016
  7. Dr Swati Gupta 17/08/2016
    • babucm 18/08/2016
  8. sarvajit singh 17/08/2016
    • babucm 18/08/2016
    • babucm 18/08/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 18/08/2016
    • babucm 19/08/2016

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