नन्ही जिद्द और चाइना डोर………………मनिंदर सिंह “मनी”

एक नन्ही सी जिद्द खामोश हो गयी,
लगता है हर जिद्द पूरी कर सो गयी,
नन्ही सी जिद्द थी नन्ही सी परी की,
देख ले वो कार की छत से जग को,
कर ले बातों से हवा, हाथ खोल के,
नन्ही सी बाहोँ में भर ले इस जग को,
ना ना करते करते खोल दी छत की,
खिड़की, नन्ही सी प्यारी परी के लिए,
पर होनी को कुछ और ही मंजूर था,
चाइना डोर ले आयी मौत उसके लिए,
दर्द से चीख उठी गले में जब फसी,
चाइना डोर, फिर एकदम चुप सी हो गयी,
खुशिया बिखेरने वाली नन्ही परी,
जिद्द करते करते जाने क्यों खामोश हो गयी,
बोलती कुछ भी नहीं, कहती कुछ भी नहीं,
एक पल में एक माँ की कोख सुनी हो गयी,
एक बाप से जिद्द करने वाली उसकी नन्ही,
परी जाने किस बात पर नाराज़ हो चुप हो गयी,
किसकी गलती थी इस खोमोशी की वजह में,
एक सवाल हर किसी के जेहन पर छोड़ गयी,,
उसकी जिद्द या पिता की दी अनुमति, या चाइना डोर,
जो ना जाने कितनो की मौत का सबब बन गयी,
पतंगबाज़ों के पल के मजे ने कितने मासूमो की,
जिंदगियां उजाड़ दी उम्र भर दर्द में जीने के लिए,
बिक रहा सब कुछ दिखा अंगूठा सरकार को,
हर कोई चुप कोई ये सोच कर मुझे क्या पड़ी,
तो कोई ये सोच कर अच्छा मुद्दा है चुनावी मुद्दा बनाने के लिए,

18 Comments

  1. Dr Swati Gupta 16/08/2016
    • mani 17/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 16/08/2016
    • mani 17/08/2016
  3. C.m sharma(babbu) 16/08/2016
    • mani 17/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/08/2016
    • mani 17/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 17/08/2016
    • mani 17/08/2016
  6. Kajalsoni 17/08/2016
    • mani 17/08/2016
    • mani 17/08/2016
  7. Meena bhardwaj 17/08/2016
    • mani 17/08/2016
  8. RAJEEV GUPTA 17/08/2016
    • mani 17/08/2016

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