मेरी रचनाएं

मेरी रचनाएं

मेरी रचनाएं शायद
कुंवारी ही रह जायेंगी
वो मूक हैं बेचारी
मूक ही चली जायेंगी।
अंधी और बधिर
इन रचनाओं से
शादी करने को
कोई भी तैयार नही
इनको सहारा दे कोई
ऐसा कोई इंसान नही
मैंने पैदा किया इनको
पाला-पोशा बड़ा किया
अब मैं बूढ़ा हो चला
चाहता हूं इनका दान करूं
हो जाए कुछ बोझ हल्का
आसानी से मर सकूं।
आज भरी इस दुनिया में
पुकार-पुकार कर कह रहा
कर लो शादी इनसे कोई
इनकी हालत पर रो रहा।
-ः0ः-

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/08/2016

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