अनुभव

मैंने लकीरों को हथेलियों से फिसलते देखा,
समय के साथ तस्वीरों को बदलते देखा,
जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे,
कश्तियों को डूबते, कभी लहरों से उभरते देखा,
नन्हें परिंदों को चहकते हुए,
कभी आँधियों में घोंसलों को उजड़ते देखा,
प्यार में टूटकर खुद को समेटते हुए,
आज बरसों बाद उसको फिर सजते-संवरते देखा……………!!
-सौरभ पाण्डेय

7 Comments

  1. mani 15/08/2016
  2. C.m sharma(babbu) 15/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" 16/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016
  5. NAVAL PAL PARBHAKAR 16/08/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 16/08/2016
  7. Kajalsoni 16/08/2016

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