पूछ रहा हिंदुस्तान……………….मनिंदर सिंह “मनी”

पूछ रहा हिंदुस्तान,
और मुझे कितना बाँटोगे,
राजनीति की खेल चाले,
महजब की बिसात पर,
कब तक खून खराबे का,
खेल खेलकर मुझे और,
कितना बाँटोगे,
पहले महजब में बांटा ,
अब जातो में,
फिर उप जातो में बाटो,
देखता हु मैं भी,
कहाँ तक तुम मुझे बाँटोगे,
ना राम ने, ना मुहमद ने,
ना नानक की बाणी ने,
ना बुद्ध के उपदेशो में,
कहीं नहीं बटा मैं,
देखता हु तुम और कितना बाँटोगे,
पहले कर दिए दो हिस्से,
फिर तीन, लगता है,
चौथे हिस्से में भी बाँटोगे,
कहते थे कुछ लोग मुझे,
हमने तुम्हे आजाद करवाया,
आजादी मिलते ही मांग ली,
कीमत तुमने अपनी देश भक्ति की,
लड़ पड़े कुर्सी खातिर,
शर्म करो कितना और बाँटोगे,
अचानक हिंदुस्तान खामोश,
फिर कुछ देख कर बोला,
अरे तुमने तो,
अपने पालनहार, बड़े होते ही घर,
देख अपना फ़ायदा रिश्ते में,
दे जहर किसी को ले पैसे,
किसी के घर की इज़्ज़त को,
झुण्ड बना सब कुछ बॉट लिया,
इससे ज्यादा क्या बाँटोगे,
पूछ रहा हिंदुस्तान ऐ “मनी” कितना और बाँटोगे

20 Comments

  1. Er Anand Sagar Pandey 15/08/2016
    • mani 16/08/2016
  2. ANAND KUMAR 15/08/2016
    • mani 16/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" 15/08/2016
    • mani 16/08/2016
  4. C.m sharma(babbu) 15/08/2016
    • mani 16/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/08/2016
    • mani 16/08/2016
  6. NAVAL PAL PARBHAKAR 16/08/2016
    • mani 17/08/2016
    • mani 17/08/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 16/08/2016
    • mani 17/08/2016
  8. Dr Swati Gupta 16/08/2016
    • mani 17/08/2016
  9. Kajalsoni 16/08/2016
    • mani 17/08/2016

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