अमर शहीद – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

मिट गया जो वतन की माटी पर
वीर वो याद किया जाएगा
जन्मा था वो जिस माटी पर
कर्ज़ उतारे बिन ना जायेगा
हिंदुस्तान उसका एक शब्द था
ना पता उसको इसका अर्थ था
फिर भी वो इस पर कुर्बान हुआ
अमिट था उसका वो हौसला
किया उसने आखिरी फैसला
छलनी था उसका पूरा सीना
फिर भी दुश्मन से लोहा लेता रहा
हाथों में था उसके तिरंगा
जुबा में था उसके हिंदुस्तान
गिर गया वो वतन की माटी पर
अब ना वो लौट आएगा
रंगी थी उसने लहू से धरती
पर्व होली का वो मनाएगा
वीरों में नाम लिखा उसका
तिरंगे से लिपटा शव उसका
अमर शहीद वो कहलाएगा
धन्य है माता जिसने पुत्र दिया
अपनी ममता का बलिदान किया
अमिट वो ममता भी रहेगी सदा

मिट गया जो वतन की माटी पर
वीर वो याद किया जाएगा

5 Comments

  1. vijaykr811 14/08/2016
  2. happy 14/08/2016
  3. mani 14/08/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 14/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016

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