ग़मज़दा – शिशिर मधुकर

मैं जब भी घर बनाता हूँ तुम आकर तोड़ जाते हो
मुझे घायल भी करते हो फ़िर तन्हा छोड़ जाते हो

मैंने तुमसे मुहब्बत पाने की सभी उम्मीदें छॊडी हैं
मुझे तड़पा के आखिर तुम कैसे सुख को पाते हो

दिलों के बीच में दूरी तुमने कुछ इतनी बढ़ा दी हैं
अजीब लगता हैं मुझको जब तुम करीब आते हो

दो जिस्म एक जान हम तुम कभी बन ना पाए हैं
मैं जब ग़मज़दा होता हूँ तो तुम मीठे गीत गाते हो

अब ताकत नहीँ हैं मुझमें तुमसे लड़ने की मधुकर
मैं तो खुश हूँ कि तुम अपने चुने रस्तो पर जाते हो

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. Meena bhardwaj 15/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  3. mani 15/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  5. sarvajit singh 15/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  6. ANAND KUMAR 15/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/08/2016
  7. C.m sharma(babbu) 15/08/2016
  8. Shishir "Madhukar" 16/08/2016

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