मैं आजाद नहीं………मनिंदर सिंह “मनी”

मैं आज़ाद नहीं,
अपनी सोच का गुलाम हु,
अन्धविश्वाश, रीतिरिवाज़ों में,
डूबा हुआ बिखरता जाम हु,
बिन मांगे दुसरो को,
देता सलाहों का पैगाम हु,
मुझसे बेहतर कोई नहीं,
सोच लिए अपने आप में,
सफल मुकाम हु,
देख किसी को पड़े मुश्किल में,
राह बदल, सुन कर अनसुना,
करने वाला इंसान हु,
चोरी कर महसूल,
समस्याओ का ढिंढोरा,
पीटने वाला अवाम हु,
जीतकर लोगो से किये,
वादे ना पूरा कर छुपने,
वाला नाम हु
ये मेरा काम नहीं,
मैं क्यों करू?
किसी बेबस बताने वाला,
उसकी बेबसी का दाम हु,
किताबो को मोड़ कर,
पैंट में अड़ा,
आशिकी की चाह लिए,
सडको पर घूम रहा,
देश का मान हु,
पाठशाला में गैर हाज़िर,
घरो में पढ़ाने वाला विद्वान हु,
बेटी को पेट में मार,
लड़का लगाएगा बेड़ी पार,
झूठा अभिमान हु,
सच कहु अपने आप में डूबा,
समझ होते हुए बे समझ हो जीता इंसान हु,
आज देखा मैंने दिल के झाक कर,
मैं आज़ाद नहीं,
अपनी स्वार्थ भरी सोच का गुलाम हु,

14 Comments

    • mani 14/08/2016
  1. Shishir "Madhukar" 13/08/2016
    • mani 14/08/2016
  2. Dr Swati Gupta 13/08/2016
    • mani 14/08/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
    • mani 14/08/2016
    • mani 14/08/2016
  4. sarvajit singh 13/08/2016
    • mani 14/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016
    • mani 15/08/2016

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