मोहब्‍बत के किनारे

आँखों की बरसात में भिगती तस्‍वीरें देखो
दिल तोडा उन्‍होने हम प्‍यार मे हारे देखो

जी रहे अब तक उनकी मोहब्बत में यारों
दूर जब से वो गये हम हूए बेसहारे देखो

टूटने लगे सारे ख्‍वाब जैसे हो कांच में सजे
हुई बेरंग उन के इश्‍क में बनी वो दिवारें देखो

कहॉ चले गये वो हमारी नजरो का नूर बनके
अब लगे दूर कोई आसंमा से हमे पुकारे देखो

मोहब्‍बत की ये दुनिया भी बडी अजीब है यारो
कैसे डूब गये हम खडे मोहब्‍बत के किनारे देखो

अभिषेक शर्मा

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 13/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
  3. Dr Swati Gupta 13/08/2016
  4. sarvajit singh 13/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016

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